गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अपने भाषण में परिसीमन, आरक्षण और लोकतांत्रिक संतुलन को लेकर विस्तार से बात रखी. उन्होंने कहा कि संविधान में यह प्रावधान है कि एससी और एसटी की आबादी बढ़ने पर उनकी सीटों की संख्या भी बढ़े. ऐसे में जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से एससी-एसटी सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं.
अमित शाह ने कहा कि एक संतुलित और समावेशी लोकतांत्रिक ढांचा तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है. संविधान ने यह अधिकार सरकार को दिया है कि वह जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे और संघीय ढांचे में संतुलन बनाए रखे.
उन्होंने साफ किया कि परिसीमन का उद्देश्य केवल सीटें बढ़ाना नहीं है, बल्कि लोकसभा में जनसंख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व तय करना और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना भी है.
परिसीमन के आधार और जरूरत
शाह ने बताया कि परिसीमन करते समय कई प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. इसमें शहरीकरण, सड़कों और कनेक्टिविटी का विकास, नए जिलों का गठन जैसी चीजें शामिल हैं. ये सभी संसद के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 81, 82 और 170 में इन सिद्धांतों का जिक्र है और इन्हीं के तहत सरकार संवैधानिक सुधार ला रही है.
महिला आरक्षण से जुड़ा संदर्भ
अमित शाह ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें साफ लिखा है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा और उसी में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा. उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यह प्रावधान बिल में जोड़ा गया था, तब भी सवाल उठे थे कि 2026 के बाद ही क्यों.
सीटों के असंतुलन का उदाहरण
शाह ने बताया कि देश में कई ऐसी लोकसभा सीटें हैं जहां मतदाताओं की संख्या बहुत ज्यादा है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ सीटों पर 40-45 लाख तक मतदाता हैं, जबकि कुछ सीटों पर केवल 6 लाख मतदाता हैं. उन्होंने कहा कि यह ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत के खिलाफ है. परिसीमन से इस असंतुलन को ठीक किया जाएगा, ताकि हर वोट का मूल्य बराबर हो सके.
विपक्ष पर निशाना
अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह स्पष्ट रुख नहीं ले पा रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष यह तय नहीं कर पा रहा कि वह अपने ही तर्क के पक्ष में है या विपक्ष में. उन्होंने अपील की कि सभी दल परिसीमन में सहयोग करें और सरकार पर भरोसा रखें, ताकि एक संतुलित और न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके.
इतिहास का हवाला
शाह ने परिसीमन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1970 के दशक में सीटों की संख्या बढ़ाई गई थी, लेकिन बाद में आपातकाल के दौरान इसे फ्रीज कर दिया गया. उन्होंने कहा कि 1976 से लेकर 2026 तक सीटों की संख्या फ्रीज रही है, और अब समय आ गया है कि इसे अपडेट किया जाए ताकि लोकतंत्र अधिक संतुलित और प्रभावी बन सके.
परिसीमन और एससी-एसटी प्रतिनिधित्व पर बयान
अमित शाह ने कहा कि संविधान में साफ प्रावधान है कि एससी और एसटी की आबादी बढ़ने पर उनकी सीटों की संख्या भी बढ़े. इसलिए जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे कहीं न कहीं एससी-एसटी सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संतुलित और समावेशी लोकतंत्र बनाना सरकार की जिम्मेदारी है, और यही जिम्मेदारी वर्तमान सरकार निभा रही है.
संविधान और परिसीमन का उद्देश्य
शाह ने कहा कि संविधान के तहत लोकसभा में जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व देना, राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना और संघीय ढांचे को मजबूत करना परिसीमन का मुख्य उद्देश्य है. उन्होंने यह भी बताया कि अनुच्छेद 81, 82 और 170 में इन सिद्धांतों का उल्लेख है और इन्हीं के आधार पर सरकार यह संवैधानिक सुधार लेकर आई है.
प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलू
उन्होंने कहा कि परिसीमन केवल गणितीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें शहरीकरण, सड़क और कनेक्टिविटी, नए जिलों का गठन जैसी प्रशासनिक वास्तविकताओं को भी ध्यान में रखा जाता है.
जनगणना और जाति गणना
उन्होंने कहा कि 2021 में कोविड के कारण जनगणना नहीं हो पाई. अब सरकार ने तय किया है कि आने वाली जनगणना में जाति का कॉलम भी शामिल होगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि जाति जनगणना को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका निर्णय कैबिनेट स्तर पर लिया जा चुका है.
उत्तर-दक्षिण विवाद पर जवाब
अमित शाह ने उत्तर-दक्षिण के मुद्दे पर कहा कि देश को इस तरह के नैरेटिव से बांटना गलत है. उन्होंने कहा कि हर राज्य, चाहे वह उत्तर का हो या दक्षिण का या फिर छोटा केंद्र शासित प्रदेश, सभी का संसद पर समान अधिकार है.
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता वेणुगोपाल द्वारा उठाए गए सवालों पर सरकार पूरी तरह तैयार है. उन्होंने साफ कहा कि अगर 50 फीसदी आरक्षण और सीट बढ़ाने को लेकर औपचारिक संशोधन (ऑफिशियल अमेंडमेंट) लाना है, तो वे एक घंटे में ड्राफ्ट तैयार कर सदन में पेश कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कुछ भी छिपाना नहीं चाहती और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहती है.
विपक्ष पर “जाल” का आरोप
शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष महिला आरक्षण को 2029 के बाद तक टालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रस्ताव ‘सुहाना जाल’ है, जिससे महिला आरक्षण समय पर लागू न हो सके. उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं यह सब देख रही हैं और चुनाव में इसका जवाब देंगी.
महिला आरक्षण पर सख्त संदेश
अमित शाह ने कहा कि अगर महिला आरक्षण बिल को रोका गया, तो इसका जिम्मेदार विपक्ष होगा. उन्होंने कहा कि ‘मातृ शक्ति’ इसका हिसाब जरूर मांगेगी और राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिलेंगे.
धर्म के आधार पर आरक्षण पर स्पष्ट रुख
शाह ने साफ कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता. उन्होंने कहा कि आरक्षण जन्म से जुड़ा होता है, धर्म बदलकर हासिल नहीं किया जा सकता. अनुच्छेद 15(4) के अनुसार आरक्षण सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों, एससी और एसटी के लिए है. उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की मांग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो संविधान के खिलाफ है.
ओबीसी मुद्दे पर कांग्रेस पर हमला
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ओबीसी के हितों की सबसे बड़ी विरोधी रही है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि1957 में काका कालेलकर आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की गईं. 1980 में मंडल आयोग की सिफारिशों को भी ठंडे बस्ते में डाला गया. 1990 में मंडल आयोग लागू होने पर भी कांग्रेस ने इसका विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनावी हार के बाद कांग्रेस खुद को ओबीसी हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है..
मोदी सरकार में ओबीसी प्रतिनिधित्व
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं (करीब 40%). ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया. राज्यों को ओबीसी सूची में बदलाव का अधिकार दिया गया.
महिला आरक्षण का इतिहास
अमित शाह ने महिला आरक्षण बिल के इतिहास को विस्तार से बताया कि1992 में नरसिम्हा राव सरकार ने पंचायतों में 33% आरक्षण दिया. 1996 में देवगौड़ा सरकार ने बिल लाया लेकिन पास नहीं हुआ. 1998 और 2003 में भी प्रयास हुए, लेकिन विरोध के कारण बिल पास नहीं हुआ. 2008 में मनमोहन सिंह सरकार बिल लाई, लेकिन लोकसभा में पेश नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि भाजपा ने कभी इस बिल का विरोध नहीं किया.
2023 में बिल पास होने का जिक्र
उन्होंने कहा कि 2023 में मोदी सरकार यह बिल लाई और सर्वसम्मति से पारित हुआ. लेकिन अब जब लागू करने की बात आई तो विपक्ष पीछे हट रहा है.
महिलाओं की भागीदारी के आंकड़े
अमित शाह ने कहा कि पहली लोकसभा में 22 महिलाएं थीं. 17वीं लोकसभा में 71 महिलाएं चुनी गईं. 18वीं लोकसभा में 75 महिलाएं चुनी गई हैं. उन्होंने कहा कि यह महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है.
मोदी सरकार की महिला योजनाएं
उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में कि15 करोड़ घरों में नल से पानी पहुंचाया गया.10 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला गैस कनेक्शन दिया गया. 12 करोड़ शौचालय बनाए गए. मुद्रा योजना में 75% लाभार्थी महिलाएं हैं.
विपक्ष पर लगातार विरोध का आरोप
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस हर फैसले का विरोध करती है:
• अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध
• राम मंदिर का विरोध
• सीएए का विरोध
• जीएसटी का विरोध
• तीन तलाक कानून का विरोध
• आयुष्मान भारत का विरोध
सीट बढ़ाने और संविधान संशोधन की बात
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में लोकसभा सीटें 550 से बढ़ाकर 850 तक करने की बात है. साथ ही महिलाओं को 33% आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संवैधानिक बदलाव किए जाएंगे.
विपक्ष की राजनीति पर तीखा हमला
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण का श्रेय मोदी सरकार को मिलने से रोकना चाहता है. उन्होंने कहा कि महिलाएं ज्यादा संख्या में मोदी सरकार को वोट देती हैं, इसलिए विपक्ष आरक्षण का विरोध कर रहा है. उन्होंने विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश जनता सब देख रही है.
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