संसद में शुक्रवार को एकजुट विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट’ देने की आखिरी मिनट की अपील और गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. असल में महिला आरक्षण बिल में यह लिखने की बात कही गई थी कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50% बढ़ जाएगी. इस पर संसद में एनडीए को हार का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही, विपक्ष ने सरकार को 12 साल में पहली बार विधायी हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया, क्योंकि प्रस्तावित कानून सदन में ज़रूरी दो-तिहाई वोट हासिल करने में नाकाम रहा.

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि 2029 से महिलाओं को आरक्षण देने का वादा करने वाला यह बिल, लोकसभा में दक्षिण के राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम करने, बीजेपी के फ़ायदे के लिए राजनीतिक नक्शा बदलने और जाति जनगणना में देरी करने की एक चाल है.

विपक्षी नेता शाह के इस दावे से बिल्कुल भी सहमत नहीं हुए कि प्रस्तावित फ़ॉर्मूले के तहत लोकसभा में दक्षिण के राज्यों का महत्व थोड़ा बढ़ जाएगा और सरकार जाति जनगणना कराने के लिए पूरी तरह तैयार है.

महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण बिल पर संसद में एनडीए को हार का सामना करना पड़ा (Photo: PTI)

‘हम चैन से नहीं बैठेंग…’

महिला आरक्षण बिल यानी संविधान के 131वे संशोधन से जुड़े इस बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े और विरोध में 230 वोट दिया गया. इसे पास होने के लिए सदन में मौजूद सदस्यों में से करीब 352 वोटों की ज़रूरत थी. इस बिल के पास न हो पाने पर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दो अन्य बिल वापस ले लिए जाएंगे, जो इस मुख्य प्रस्ताव से अंदरूनी तौर पर जुड़े हुए हैं. इनमें से एक परिसीमन पर है. उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष ने महिलाओं को सम्मानित करने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया. हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि देश की महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण मिले.”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “उन्होंने (विपक्ष ने) प्रगति के बजाय राजनीति को चुना. उनका विरोध इस बात को पूरी तरह से बेनकाब करता है कि वे असल में किसके हितों की सेवा करते हैं.”

विधेयक पर वोटिंग से पहले PM नरेंद्र मोदी ने सदस्यों से अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की गुजारिश की थी. हालांकि, बीते सालों में ऐसे मौके आए हैं, जब मोदी सरकार ने अपनी विधायी पहलों से कदम पीछे खींचे हैं, जैसे कि कृषि कानून. लेकिन यह पहली बार है, जब उसका कोई बिल संसद में पास नहीं हो सका है.

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‘देश टुकड़ों में बंट जाएगा…’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की, अपने खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों को महिला आरक्षण से जोड़ने की नापाक और शरारतपूर्ण कोशिश लोकसभा में ऐतिहासिक रूप से फेल हो गई है.”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, “बीजेपी ने महिला आरक्षण विधेयक को आगे रखते हुए परिसीमन विधेयक पेश किया है. वह लोकसभा में सीटों की तादाद बढ़ाकर करीब 850 करने की कोशिश कर रही है. इससे देश टुकड़ों में बंट जाएगा.” उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन के नाम पर साजिश मंजूर नहीं है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है. 23 अप्रैल को, हम दिल्ली के अहंकार को और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को भी मिलकर हरा देंगे.”

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “संसद में परिसीमन बिल फेल हुआ. यह मोदी के अहंकार की हार हुई है.”

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महिला विरोधी विपक्ष?

गौर करने वाली बात है कि यह नरेंद्र मोदी के उस बयान के एक दिन बाद देखने को मिला, जिसमें उन्होंने विपक्षी पार्टियों से समर्थन के लिए संपर्क साधते हुए काफी हद तक निष्पक्ष रवैया अपनाया था. इसके साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी थी कि अगर उन्होंने (विपक्ष) समर्थन नहीं दिया तो उन्हें महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. अमित शाह ने दो दिनों तक चली लंबी बहस के जवाब में काफी आक्रामक रुख अपनाया, जब बिल का भविष्य साफ़ हो चुका था. उन्होंने हर राज्य में लोकसभा सीटों को 50% तक बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देने और दक्षिण भारत के साथ भेदभाव के विपक्ष के आरोप को खारिज किया.

बीजेपी ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के अन्य सदस्यों को ‘महिला-विरोधी’ करार देने में तेज़ी दिखाई, क्योंकि 2029 से आरक्षण का वादा करने वाला बिल पास न होने के तुरंत बाद, संसद परिसर में हल्की बारिश के बीच सत्ताधारी NDA की महिला सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया.

NDA सदस्यों ने भी एक बैठक की और उम्मीद है कि वे अपने विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू करेंगे. वोटिंग से पहले, पीएम मोदी ने सांसदों से भावुक अपील की थी कि वे अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनें और अपने परिवार की महिलाओं को याद करते हुए, महिलाओं को उनका उचित हक दिलाएं और बिल को सर्वसम्मति से पास करवाना सुनिश्चित करें. उन्होंने कहा, “सरकार ने तथ्यों और तर्क के आधार पर इस कानून से जुड़ी सभी आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर कर दिया है. सभी चिंताओं का समाधान कर दिया गया है और जानकारी में जो भी कमियां थीं, उन्हें भी पूरा कर दिया गया है.”

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