घर में ताक-झांक करता था पड़ोसी, विरोध किया तो कर दी हत्या… ठाणे कोर्ट ने 9 साल बाद दोषी को सुनाई उम्रकैद की सजा – thane mumbra neighbour murder case life imprisonment verdict pvzs


महाराष्ट्र के ठाणे जिले में अदालत ने 9 साल पुराने हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. पड़ोसियों के आपसी विवाद में हुई इस हत्या के मामले में 42 वर्षीय आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जबकि सबूतों के अभाव में उसके माता-पिता को बरी कर दिया गया है. यह मामला साल 2016 का है, जिसमें एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. अदालत ने गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया.

यह मामला थाइन जिले के मुंब्रा इलाके के कौसा क्षेत्र का है, जहां 21 मई 2016 को एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था. जानकारी के मुताबिक, आरोपी मोहम्मद असगर उर्फ समर दिलशाद हुसैन सैयद पर आरोप था कि वह अपने पड़ोसी अहमद राजा शेख के घर में झांकता था और उसकी बहन को परेशान करता था. इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई थी. विवाद इतना बढ़ गया कि बात हाथापाई तक पहुंच गई.

बताया गया कि झगड़े के दौरान आरोपी असगर अचानक अपने घर के अंदर गया और वहां से चाकू लेकर वापस लौटा. इसके बाद उसने अहमद राजा शेख पर कई बार चाकू से हमला किया. यह पूरी घटना इलाके के कई लोगों के सामने हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. घायल अवस्था में पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी रही.

अहमद राजा शेख ने तीन दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन अंततः सायन अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की. मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिन्होंने घटना की पुष्टि की है.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी एस देशमुख ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी मोहम्मद असगर को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 504 (जानबूझकर अपमान) के तहत दोषी ठहराया है. अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर घातक हमला किया था, जिससे पीड़ित की मौत हुई.

वहीं, आरोपी के माता-पिता दिलशाद हुसैन शाहनशाह सैयद और एफसरी दिलशाद हुसैन सैयद को अदालत ने बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि दोनों की हत्या में कोई सक्रिय भूमिका थी. गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया, जिसमें बाद में यह जोड़ा गया कि माता-पिता ने पीड़ित को पकड़ा था.

जज देशमुख ने अपने फैसले में कहा कि गवाहों द्वारा दिए गए बयानों में सुधार किए गए, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है. इसी वजह से आरोपी के माता-पिता को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया है. इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि अदालत केवल ठोस सबूतों के आधार पर ही सजा सुनाती है और शक की स्थिति में आरोपी को राहत मिल सकती है.

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