करियर में सफलता अक्सर नौकरी बदलने, पोस्ट पाने या कुछ नया शुरू करने जैसी बड़ी उपलब्धियों से जुड़ी होती है. लेकिन असल में लंबे समय तक सफलता आमतौर पर छोटी-छोटी डेली हैबिट्स पर भी निर्भर करती है. इनमें से एक सबसे कम आंकी जाने वाली आदत है पढ़ना. टेस्ला और लिफ्ट जैसा कंपनियों का नेतृत्व कर चुके जॉन मैकनील ने शीर्ष अधिकारियों के साथ काम करते हुए एक आदत देखी है. उनमें से कई लोग पढ़ने को प्राथमिकता देते हैं न कि कभी-कभार, बल्कि अपनी रोजाना के दिनचर्या में. वह रोजाना पढ़ते हैं.
बड़े कंपनियों के लीडरों के लिए पढ़ना केवल एक शौक नहीं बल्कि एक मानसिक जिम की तरह काम करता है. जब हम एलन मस्क या वॉरेन बफेट की बात करते हैं, तो वे पढ़ने को एक डेली डिसिप्लिन मानते हैं. इससे प्रभावित होकर मैकनील ने हर दिन करीब 90 मिनट पढ़ने की ठान ली. उनका मकसद सिर्फ जानकारी बढ़ाना नहीं था बल्कि अपने दिमाग को एक्टिव रखना और अपनी सोच को बेहतर बनाना था. लगातार पढ़ने से हमें कई फायदे होते हैं-
नए विचार: हमें नई बातों, अलग-अलग बिजनेस और नए नजरियों के बारे में पता चलता है.
बेहतर समझ: समय के साथ हम यह समझने लगते हैं कि अलग-अलग बातें आपस में कैसे जुड़ी हुई हैं.
सही फैसले: यह आदत ऑफिस या काम में सही फैसले लेने और मुश्किलों को सुलझाने में बहुत मदद करती है.
सफल लोगों में पढ़ना है आम आदत
दुनिया के सबसे सफल लोगों में पढ़ने की आदत बहुत आम होती है. साल 2025 में जेपी मॉर्गन के एक सर्वे से पता चलता है कि जितने भी अरबपति हैं उनमें नियमित रूप से पढ़ना सबसे कॉमन आदत है. ये लोग अपनी सफलता का श्रेय किताबों को देते हैं. साथ ही मनोरंजन के लिए पढ़ना भी कम आम होता जा रहा है. YouGov की रिपोर्ट कहती हैं कि बहुत से लोगों ने पिछले पूरे साल में एक भी किताब नहीं पढ़ते हैं. फ्लोरिडा और लंदन की यूनिवर्सिटी के रिसर्च बताते हैं कि खासकर युवा अब पढ़ने में बहुत कम समय बिता रहे हैं. उनके बीच पढ़ने की आदत में लगातार गिरावट देखी जा रही है.
पढ़ना, करियर को भी देती है शेप
पढ़ना आपको केवल नॉलेज नहीं देती है बल्कि संवाद करने और संबंध बनाने के तरीके को भी प्रभावित करते हैं. मैकनील का मानना है कि जो लोग ज्यादा पढ़ते हैं, उनकी सोच गहरी हो जाती है. वह थोड़ा हटकर सवाल करते हैं जो उन्हें दूसरे लोगों से अलग बनाता है. उन्होंने बताया कि एलन मस्क के साथ अपनी शुरुआती बातचीत के दौरान उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बात करने के बजाय टेस्ला की चुनौतियों को समझने पर ध्यान लगाया. इस दृष्टिकोण ने उन्हें अलग पहचान बनाने में मदद की और कंपनी में काम करने का मौका मिला.
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