19 अप्रैल 1775 सुबह लगभग 5 बजे पैट्रियट नेताओं को पकड़ने और पैट्रियट शस्त्रागार पर कब्जा करने के मिशन पर निकले 700 ब्रिटिश सैनिक लेक्सिंगटन में दाखिल हुए. वहां उन्हें शहर के मैदान में कैप्टन जॉन पार्कर के नेतृत्व में 77 हथियारबंद सैनिक इंतजार करते नजर आए. ब्रिटिश मेजर जॉन पिटकेर्न ने संख्या में कम पैट्रियट्स को तितर-बितर होने का आदेश दिया. अचानक, एक अज्ञात तोप से गोली चली और जल्द ही बंदूक के धुएं का बादल मैदान को ढक लिया. लेक्सिंगटन की इस छोटी सी सशस्त्र लड़ाई अमेरिकी क्रांति की शुरुआत मानी जाती है.

लेक्सिंगटन की ये झड़प जब खत्म हुई तो आठ अमेरिकी सैनिक मृत या मरणासन्न अ थे और 10 अन्य घायल हो गए थे. इस लड़ाई में केवल एक ब्रिटिश सैनिक घायल हुआ, लेकिन अमेरिकी क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी.1775 तक, अमेरिकी उपनिवेशों और ब्रिटिश सरकार के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था.

मैसाचुसेट्स में  जहां देशभक्त नेताओं ने एक समानांतर क्रांतिकारी सरकार बनाई और बोस्टन पर कब्जा करने वाली ब्रिटिश सेना के साथ जंग की तैयारी के लिए मिलिशिया को ट्रेंड किया. 1775 की गर्मियों की शुरुआत में, मैसाचुसेट्स के ब्रिटिश गवर्नर जनरल थॉमस गेज को इंग्लैंड से अमेरिकी विद्रोहियों के लिए उपलब्ध सभी हथियारों और बारूद के भंडारों को जब्त करने के निर्देश मिले.

18 अप्रैल को उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों को कॉनकॉर्ड में देशभक्त शस्त्रागार पर चढ़ाई करने और लेक्सिंगटन में छिपे हुए देशभक्त नेताओं सैमुअल एडम्स और जॉन हैनकॉक को पकड़ने का आदेश दिया. बोस्टन पैट्रियट्स ब्रिटिश सेना द्वारा इस तरह की सैन्य कार्रवाई की तैयारी काफी समय से कर रहे थे.

ब्रिटिश योजना की जानकारी मिलते ही पैट्रियट्स पॉल रेवरे और विलियम डॉवेस को सैनिकों को संगठित करने और एडम्स और हैनकॉक को चेतावनी देने का आदेश दिया गया. जब ब्रिटिश सैनिक लेक्सिंगटन पहुंचे, तो वहां सैनिकों का एक समूह उनका इंतजार कर रहा था. पैट्रियट्स कुछ ही मिनटों में हार गए, लेकिन युद्ध शुरू हो चुका था, जिसके चलते मैसाचुसेट्स के ग्रामीण इलाकों में हथियार उठाने का आह्वान किया गया.

जब ब्रिटिश सैनिक सुबह लगभग 7 बजे कॉनकॉर्ड पहुंचे, तो उन्होंने खुद को सैकड़ों हथियारबंद देशभक्तों (पैट्रियट्स) से घिरा पाया. वे अमेरिकियों द्वारा एकत्र किए गए सैन्य भंडार को नष्ट करने में कामयाब रहे, लेकिन जल्द ही मिनुटमेन के एक गिरोह ने उन पर हमला कर दिया, जिससे भारी नुकसान हुआ. ब्रिटिश सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल फ्रांसिस स्मिथ ने अपने सैनिकों को अमेरिकियों से सीधे भिड़ने के बजाय बोस्टन लौटने का आदेश दिया. जैसे ही ब्रिटिश सैनिक 16 मील की अपनी यात्रा को वापस ले गए, उन पर देशभक्त निशानेबाजों ने पेड़ों, चट्टानों और पत्थर की दीवारों के पीछे से लगातार गोलीबारी की.

लेक्सिंगटन में कैप्टन पार्कर की मिलिशिया ने अपना बदला लिया, जब लाल कोट वाले सैनिक जल्दबाजी में उनके शहर से गुजरे तो उन्होंने कई ब्रिटिश सैनिकों को मार गिराया. जब तक ब्रिटिश अंततः बोस्टन की सुरक्षा में पहुंचे, तब तक लगभग 300 ब्रिटिश सैनिक मारे गए, घायल हुए या लापता हो गए थे. देशभक्तों को 100 से भी कम नुकसान हुआ.

लेक्सिंगटन और कॉनकॉर्ड की लड़ाई अमेरिकी क्रांति की पहली लड़ाई थी. एक ऐसा संघर्ष जो औपनिवेशिक विद्रोह से शुरू होकर एक विश्वयुद्ध में तब्दील हो गया और सात साल बाद, स्वतंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका को जन्म देगा.

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