जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजारबानी को पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) द्वारा दो साल का बैन दिए जाने के बाद मामला गरमा गया है. खिलाड़ी की एजेंसी World Sports Xchange ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा है कि मुजारबानी ने कभी कोई औपचारिक कॉन्ट्रैक्ट साइन ही नहीं किया था, ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने का सवाल ही नहीं उठता.
मुजारबानी को पहले PSL में रिप्लेसमेंट के तौर पर साइन किए जाने का ऐलान हुआ था, जिसकी डील करीब PKR 11 मिलियन (लगभग 37.4 लाख रुपये) की बताई गई. लेकिन बाद में उन्होंने नाम वापस लेकर आईपीएल की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ जुड़ना चुना, जहां वे मुस्तफिजुर रहमान के रिप्लेसमेंट बने. इसी के बाद PSL ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन पर दो साल का बैन लगा दिया.
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एजेंसी का बयान: ‘कॉन्ट्रैक्ट ही नहीं, तो उल्लंघन कैसा?’
एजेंसी ने कहा कि उन्होंने पिछले छह हफ्तों तक चुप्पी बनाए रखी ताकि विवाद न बढ़े, लेकिन खिलाड़ी के खिलाफ “भारी और आपत्तिजनक आलोचना” के चलते अब जवाब देना जरूरी हो गया. एजेंसी के मुताबिक, Islamabad United ने मुजारबानी से PSL में खेलने को लेकर संपर्क किया था और शर्तें NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मिलने के अधीन तय हुई थीं.
लेकिन एजेंसी का दावा है कि बिना कॉन्ट्रैक्ट के NOC मिल ही नहीं सकता और यही कॉन्ट्रैक्ट कभी दिया ही नहीं गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐलान के दो हफ्ते बाद तक भी कोई कॉन्ट्रैक्ट जारी नहीं किया गया.
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बैन पर सवाल: ‘सजा जरूरत से ज्यादा’
एजेंसी ने दो साल के बैन को “अत्यधिक” बताते हुए कहा कि यह उन मामलों से भी ज्यादा सख्त है, जहां खिलाड़ियों ने वास्तव में कॉन्ट्रैक्ट तोड़ा था. एजेंसी के बयान के बाद यह विवाद और बढ़ गया है और आने वाले दिनों में इस पर और अपडेट सामने आ सकते हैं.
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