Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर पढ़ें मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आरती, पूरी होगी मनोकामना – Akshaya Tritiya 2026 date goddess Laxmi lord vishnu arti puja Vidhi shubh muhurt tvisu


आज अक्षय तृतीया है. इस दिन सोने-चांदी जैसी मूल्यवान चीजों की खरीदारी बहुत शुभ मानी जाती है. कहते हैं कि अक्षय तृतीया पर दान-धर्म के कार्यों से मिलने वाला पुण्य अक्षय होता है. यानी इस दिन कमाए हुए पुण्य कभी खत्म नहीं होते हैं. अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन श्री हरि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूरे विधि विधान से पूजा करें. फिर पूरी श्रद्धा के साथ इनकी आरती करें. आपके मन की हर इच्छा जरूर पूरी होगी.

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

ॐ जय जगदीश हरे…

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

स्वामी दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

ॐ जय जगदीश हरे…

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।

स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥

ॐ जय जगदीश हरे…

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

स्वामी तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

ॐ जय जगदीश हरे…

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

ॐ जय जगदीश हरे…

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

भगवान सभी के जीवनदाता हैं।

किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥

ॐ जय जगदीश हरे…

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

स्वामी तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥

ॐ जय जगदीश हरे…

विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।

स्वामी पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे…

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

ॐ जय जगदीश हरे…

आरती श्री लक्ष्मी जी

ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।

मैं दिन-रात आपकी सेवा करता हूँ, हरि विष्णु विधाता।

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी,तुम ही जग-माता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत,नारद ऋषि गाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावत,ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।

कर्म-प्रभा-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता।

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं,सब सद्गुण आता।

सब सम्भव हो जाता,मन नहीं घबराता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते,वस्त्र न कोई पाता।

खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उत्तम कोटि का मन्दिर सुन्दर, क्षीरसागरमय।

रत्न चतुर्दश तुम बिन,कोई नहीं पाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई जन गाता।

उर आनन्द समाता,पाप उतर जाता॥

ॐ जय लक्ष्मी माता॥

—- समाप्त —-



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