‘आधी सैलरी किराए में…’ क्या बेंगलुरु में रहना अब युवाओं के बजट से बाहर है – bengaluru cost of living software engineer viral post ntcpsc


बेंगलुरु करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं के बजट से बाहर होता जा रहा है. हाल में सोशल मीडिया पर एक युवा साफ्टवेयर इंंजीनियर की एक पोस्ट ने उन सैकड़ों प्रोफेशनल को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है जो बेंगलुरु में नौकरी का प्लान बना रहे हैं.

जेपी मॉर्गन चेस (JPMorgan Chase) में काम करने वाले एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद, भारत की टेक राजधानी में रहने के खर्च को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. इस पोस्ट के कारण कई लोग अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या करियर की शुरुआत कर रहे पेशेवरों के लिए ₹30,000 से ₹35,000 का मासिक बजट टिकाऊ या वास्तव में व्यावहारिक है.

23 साल के इंजीनियर ने अपने मासिक खर्चों का विवरण साझा किया है, जो किसी महानगर में रहने वाले एक युवा पेशेवर की आर्थिक स्थिति पेश करता है. उनका सबसे बड़ा खर्च किराया है जो रहने की जगह के उनके हिस्से के तौर पर लगभग ₹17,000 बैठता है. रहने के अलावा, उनके मासिक खर्चों में करीब ₹5,000 राशन पर खर्च होते हैं, जबकि बाहर खाना खाने का खर्च ₹3,000 से ₹6,000 के बीच रहता है.
शॉपिंग का खर्च काफी बदलता रहता है ₹3,000 से ₹7,000 के बीच जो जरूरत के हिसाब से बदलता रहता है. अन्य अतिरिक्त खर्च जैसे कि दवाइयां और अन्य फुटकर जरूरतें ₹2,000 से ₹6,000 के बीच रहती हैं, वहीं यात्रा का खर्च इसमें ₹1,000 से ₹2,000 और जोड़ देता है. कुल मिलाकर, उनका मासिक खर्च ₹30,000 से ₹35,000 की सीमा में आता है, जिसने उन्हें ऑनलाइन मज़ाकिया अंदाज़ में यह सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया- “क्या मैं मुश्किल में हूं?”

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेज़ी से वायरल हो गई और उन हज़ारों युवा पेशेवरों के बीच चर्चा का विषय बन गई, जो अपने बजट में भी इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखते हैं. कई यूज़र्स ने इन खर्चों को बेंगलुरु के हिसाब से सही बताया, खासकर शहर के आसमान छूते किराए और बुनियादी ज़रूरतों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए.

वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि शॉपिंग और बाहर खाने जैसे शौकिया खर्चों में कटौती कर बचत की जा सकती है, सोशल मीडिया पर लोगों ने तर्क दिया कि किराया और राशन का खर्च तो मजबूरी है, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर दिखाने की होड़ चुपके से जेब पर भारी पड़ने लगती है.

खर्चों के इस ब्योरे ने भारत के बड़े शहरों में रहने की बढ़ती लागत पर एक नई बहस छेड़ दी है. बेंगलुरु, जिसे भारत का ‘सिलिकॉन वैली’ कहा जाता है, वहां अच्छी सैलरी वाली नौकरियां तो बहुत हैं, लेकिन घर के किराए और रहने के ऊंचे खर्च ने आम पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.”

करियर की शुरुआत कर रहे युवा पेशेवरों के लिए एक आरामदायक जीवन जीने और साथ में बचत कर पाने के बीच का संतुलन बनाना अब काफी मुश्किल होता जा रहा है. इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर का मामला एक कड़वी सच्चाई को सामने रखता है. उनके बजट का आधा हिस्सा तो सिर्फ घर के किराए में चला जाता है, यह दिखाता है कि भारत के बड़े शहरों में कमाई जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे कहीं ज्यादा तेजी से खर्च और महंगाई बढ़ रहे हैं.

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