पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने की जो कोशिश की थी, उसे बड़ा झटका लगा है. दरअसल, इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने से पहले ही फेल हो गया. ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली इस चर्चा का हिस्सा नहीं बनेगा. यह फैसला तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए अपने दूत भेजने की बात कही थी, लेकिन साथ ही ईरान को यह धमकी भी दी थी कि अगर शर्तें नहीं मानीं तो हमला किया जाएगा.
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान ने इस बातचीत को सिरे से खारिज कर दिया है. वहां की सरकार का मानना है कि वाशिंगटन की मांगें न सिर्फ बहुत ज्यादा हैं, बल्कि वह बार-बार अपना स्टैंड भी बदल रहा है. इस इनकार के पीछे समुद्री घेराबंदी को भी एक बड़ी वजह बताया गया है, जिसे सीजफायर का सीधा उल्लंघन करार दिया गया.
इसके अलावा ईरान ने समुद्र में की गई अपनी घेराबंदी को सीजफायर का उल्लंघन बताया है. उधर, तेहरान की सड़कों पर भी आम जनता सरकार के समर्थन में उतर आई है. लोगों का कहना है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने आज तक अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया है. वहीं, सड़कों पर उतरी जनता का भी कहना है कि अमेरिका ने आज तक अपना कोई वादा पूरा नहीं किया, इसलिए उस पर भरोसा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता.
इस युद्ध को चलते हुए लगभग 50 से ज्यादा दिन बीत चुके हैं और इसने पूरी दुनिया की रफ्तार रोक दी है. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी इस जंग की वजह से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को इतिहास का सबसे बड़ा झटका लगा है. अहम समुद्री रास्तों के बंद होने की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. 28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग ने अब तक हजारों लोगों की जान ले ली है.
ऐसे में साफ है कि पाकिस्तान ने बीच-बचाव कर शांति की जो उम्मीद जगाई थी, तेहरान के इस कड़े रुख के बाद उस पर पानी फिर गया है.
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