छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके से माओवादियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता सामने आई है. उत्तरी बस्तर के कांकेर जिले में 8 लाख के इनामी एक माओवादी कमांडर ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है. सरेंडर करने वाले माओवादी की पहचान दारसु शोरी के रूप में हुई है, जो पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी यानी PLGA की कंपनी नंबर पांच में सक्रिय था.

कांकेर के पुलिस अधीक्षक निखिल राकेचा ने बताया कि दारसु शोरी ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए आत्मसमर्पण किया. उसने सरेंडर के दौरान एक AK-47 असॉल्ट राइफल और कुछ इलेक्ट्रॉनिक संचार गैजेट्स भी पुलिस को सौंपे. बताया जा रहा है कि वह माओवादियों की उत्तरी बस्तर डिवीजन कमेटी के तहत काम कर रहा था.

PPCM स्तर का सदस्य था और संगठन में अहम भूमिका निभाता था. ये सदस्य अक्सर लॉजिस्टिक सपोर्ट देने, लैंडमाइन लगाने और PLGA के भीतर सेक्शन कमांडर जैसी जिम्मेदारियां निभाने में शामिल रहते हैं. दारसु शोरी से मिली अहम जानकारियों के आधार पर अब इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है.

पुलिस अन्य नक्सलियों को सरेंडर कराकर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है. बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने इस आत्मसमर्पण का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में लौटने का फैसला किया है, जो एक सकारात्मक संकेत है.

आईजी सुंदरराज ने एक बार फिर बाकी बचे माओवादी कैडरों से अपील की है कि वे भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों. उन्होंने साफ कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास के दरवाजे खुले हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो माओवादी हिंसा का रास्ता जारी रखेंगे, उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा.

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