भारत में जहां लोग पेट भरते तक खाते हैं तो वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जहां के लोग अपनी भूख या क्षमता से कम खाने पर जोर देते हैं. जापानी खाने की आदतें सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें मन, शरीर और लंबी उम्र से भी जोड़ा जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, जापान में परंपरागत भोजन करने का तरीका, बैलेंस मील और माइंडफुल ईटिंग पर जोर दिया जाता है. यही कारण है कि ये आदतें सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती हैं. जापानी लोग इतने फिट होते हैं इसका सीक्रेट उनके खाने का तरीका है. तो आइए आज जान लेते हैं जापानी लोग किस तरह से खाते हैं जिससे वे इतने फिट रहते हैं.
हारा हची बू – हारा हची बू का सर्वश्रेष्ठ
जापानी खाने का यह तरीका कहता है कि हमें तब तक ही खाना चाहिए जब तक पेट 80 प्रतिशत न भर जाए. इस तकनीक उद्देश्य जरूरत से ज्यादा खाने (ओवरईटिंग) से बचना है. जापानी लोग मानते हैं कि पेट को थोड़ा खाली रखने से डाइजेशन बेहतर रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है.
इतादाकिमासु (इतादाकिमासु)
इटाडाकिमासु का शाब्दिक अर्थ है ‘मैं विनम्रता से स्वीकार करता हूं’. खाने से पहले यह बोलकर भोजन के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है. यह तकनीक खाने को एक पवित्र क्रिया मानती है जिससे व्यक्ति शांति और एकाग्रता के साथ भोजन करता है.
इचिजू सांसाई (Ichiju Sansai)
इचिजू सांसाई का मतलब है ‘एक सूप और 3 डिश’. इसमें चावल और सूप के साथ प्रोटीन और सब्जियों वाली 3 छोटी-छोटी डिश शामिल होती हैं. यह तरीका भोजन में वैरायटी देता है जिससे शरीर को भरपूर न्यूट्रिशन मिलता है और कैलोरी भी कंट्रोल रहती है.
मोटाएनाई (Mottainai)
यह तरीका भोजन बर्बाद न करने पर जोर देता है. इसके तहत भोजन के हर हिस्से का सम्मान किया जाता है और उसे फेंकने के बजाय इस्तेमाल किया जाता है. यह आदत न केवल अनुशासन सिखाती है बल्कि चीजों के प्रति जागरूक बनाकर एक बैलेंस लाइफस्टाइल बनाती है.
धीरे-धीरे खाना (Mindful Eating)
जापानी कल्चर में छोटे निवाले लेकर अच्छी तरह चबाकर खाने पर जोर दिया जाता है. धीरे खाने से दिमाग को पेट भरने के सिग्नल पहुंचने का समय मिल जाता है. यह डाइजेशन में सुधार करता है और आप अनजाने में ज्यादा कैलोरी लेने से बच जाते हैं.
—- समाप्त —-

