अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत और मजबूत कर दी है. उसका तीसरा परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (CVN-77) अब मिडिल ईस्ट क्षेत्र में पहुंच गया है. यह कैरियर अफ्रीका के दक्षिणी छोर (केप ऑफ गुड होप) से घूमकर आया है, ताकि लाल सागर के खतरनाक रास्ते से बच सके. अब इस क्षेत्र में अमेरिका के पास तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं. इससे अमेरिकी नौसेना की हवाई ताकत, हमला करने की क्षमता और क्षेत्र में नियंत्रण बहुत बढ़ जाएगा.
USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश क्या है?
यह अमेरिकी नौसेना का निमित्ज़ क्लास का 10वां और आखिरी सुपर कैरियर है. यह 2009 में सेवा में आया था. इसका नाम अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है.
यह एक फ्लोटिंग एयरबेस की तरह काम करता है, जो बिना किसी विदेशी आधार के हजारों किलोमीटर दूर से भी हवाई हमले कर सकता है. यह कैरियर परमाणु ऊर्जा से चलता है, इसलिए इसे ईंधन भरने की जरूरत बहुत कम पड़ती है. यह कई सालों तक लगातार समुद्र में रह सकता है.

- वजन (डिस्प्लेसमेंट): लगभग 1,02,000 से 1,04,000 टन.
- लंबाई: 1,092 फीट (लगभग 333 मीटर) – यानी तीन फुटबॉल मैदान जितनी लंबी.
- चौड़ाई (फ्लाइट डेक): 252 फीट (लगभग 77 मीटर).
- गति: 30 नॉट्स से ज्यादा (लगभग 56 किमी प्रति घंटा).
- इंजन: दो A4W परमाणु रिएक्टर, जो 20-25 साल तक बिना रिफ्यूलिंग के चल सकते हैं.
- क्रू (कर्मी): जहाज पर 3200 नाविक + एयर विंग के 2480 सदस्य = कुल लगभग 5000 से 5700 लोग.
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हवाई ताकत (एयरक्राफ्ट कैपेसिटी)
यह कैरियर 60 से 90 तक फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर ले जा सकता है. सामान्य रूप से इसमें शामिल होते हैं…
- F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट (मल्टी रोल हमला और लड़ाकू).
- EA-18G ग्राउलर (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर – दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन को जाम करने वाले).
- E-2D हॉकी (एयरबोर्न अर्ली वार्निंग – दुश्मन के हमले की पहले सूचना देने वाले).
- MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर (एंटी-सबमरीन, सर्च एंड रेस्क्यू).
चार स्टीम कैटापल्ट से जेट को 0 से 241 km/hr की रफ्तार में कुछ सेकंड में लॉन्च किया जा सकता है. एक दिन में यह 120-150 सामान्य सॉर्टी (उड़ानें) और जरूरत पड़ने पर 240 सॉर्टी तक कर सकता है. एक दिन में सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.

डिफेंसिव हथियार
- 2 × Mk 29 लॉन्चर – ईवॉल्व्ड सी स्पैरो मिसाइल (ESSM) – मध्यम दूरी के हवाई हमलों से बचाव.
- 2 × RIM-116 रोलिंग एयरफ्रेम मिसाइल (RAM) – छोटी दूरी के एंटी-शिप मिसाइल और हवाई खतरे से बचाव.
- 3 × Phalanx CIWS (20mm गैटलिंग गन) – बहुत करीब आने वाली मिसाइल या विमान को 4500 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से नष्ट करना.
- Mk 38 25mm मशीन गन सिस्टम – छोटी नावों या ड्रोन से बचाव.
इसके अलावा केवलार आर्मर महत्वपूर्ण हिस्सों पर लगा हुआ है. रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और डेकोय सिस्टम भी बहुत एडवांस हैं.
इससे अमेरिकी फोर्सेज की ताकत कितनी बढ़ेगी?
अब मिडिल ईस्ट में तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर (USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश, USS अब्राहम लिंकन और USS गेराल्ड आर. फोर्ड) होने से अमेरिका की हवाई ताकत कई गुना बढ़ गई है. हर कैरियर अपना पूरा स्ट्राइक ग्रुप साथ लाता है – जिसमें डेस्ट्रॉयर, क्रूजर और सप्लाई शिप होते हैं. तीनों कैरियर मिलकर सैकड़ों लड़ाकू विमान, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्लेन और अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट मुहैया करा सकते हैं.
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यह ताकत ईरान या किसी भी विरोधी को हवाई हमले, निगरानी और समुद्री ब्लॉकेड करने में बहुत मदद करेगी. एक कैरियर अकेले ही एक छोटे देश की पूरी एयर फोर्स जितनी ताकत रखता है. तीन कैरियर होने से अमेरिका लगातार हवाई हमले कर सकता है. दुश्मन की नौसेना को दबा सकता है. अपने सहयोगी देशों (जैसे इजरायल) की रक्षा कर सकता है.
यह कैरियर अफ्रीका घूमकर आया क्योंकि लाल सागर और बाब एल मंदेब में खतरा था. इससे पता चलता है कि अमेरिका लंबे समय तक क्षेत्र में रहने की तैयारी कर रहा है. USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश का मिडिल ईस्ट पहुंचना अमेरिका की सैन्य शक्ति का बड़ा प्रदर्शन है. यह न सिर्फ हवाई हमलों की क्षमता बढ़ाता है बल्कि क्षेत्र में अमेरिका का दबदबा भी मजबूत करता है. तीन कैरियर साथ होने से कोई भी विरोधी सोच-समझकर कदम उठाएगा.
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