Sita Navami 2026: आज मनाई जा रही है जानकी नवमी, जानें पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त – sita navami 2026 date muhurat puja vidhi tvisz


Sita Navami 2026: आज वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है और आज माता सीता का प्राकट्य उत्सव मना रहा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, आज ही के दिन पुष्य नक्षत्र के दौरान राजा जनक को हल चलाते समय भूमि से कन्या के रूप में माता सीता प्राप्त हुई थीं.  यही कारण है कि आज के दिन को सीता नवमी के साथ-साथ जानकी नवमी भी कहा जाता है.

पूजा का सटीक समय और मुहूर्त
आज पूजा के लिए मध्याह्न काल सबसे श्रेष्ठ माना गया है.  शुभ मुहूर्त सुबह 10:59 AM से दोपहर 01:38 PM तक रहेगा. नवमी तिथि कल यानी 24 अप्रैल को शाम 06:14 PM से शुरू होकर आज 25 अप्रैल को शाम 04:30 PM तक रहेगी.  इस समय के भीतर की गई आराधना भक्तों के लिए विशेष फलदायी होगी.

आज की सरल पूजा विधि
संकल्प: सुबह स्नान के बाद माता सीता और भगवान राम के समक्ष व्रत का संकल्प लें.

स्थापना: चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर राम-सीता की प्रतिमा स्थापित करें.

अभिषेक: आज के दिन पंचामृत और गंगाजल से अभिषेक का विशेष महत्व है.

पेशकश: माता सीता को श्रृंगार की सामग्री और पीले फूल चढ़ाएं. तिल के तेल या घी का दीपक जलाकर आरती करें.

विवाह और समृद्धि का वरदान
धार्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से पृथ्वी दान के समान पुण्य मिलता है.  सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए आज विशेष अनुष्ठान करती हैं. वहीं, जिन जातकों के विवाह में बाधा आ रही है, उनके लिए आज माता जानकी की स्तुति करना चमत्कारी साबित हो सकता है.

क्या है सीता नवमी का महत्व?
शास्त्रों के अनुसार, सीता नवमी का महत्व उतना ही है जितना चैत्र मास की राम नवमी का है.  माता सीता को लक्ष्मी जी का अवतार माना गया है, इसलिए आज उनकी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है.  दान-पुण्य के लिए भी आज का दिन अत्यंत शुभ है.

सुहाग सामग्री का दान
चूंकि माता सीता अखंड सौभाग्य की देवी हैं, इसलिए आज विवाहित महिलाओं को सुहाग की वस्तुएं जैसे चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी और लाल चुनरी का दान करना चाहिए.  माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन के तनाव दूर होते हैं.

अन्न और जल दान
वैशाख मास की गर्मी को देखते हुए आज अन्न (चावल, गेहूं) और जल का दान महादान कहलाता है. आप किसी मंदिर में या जरूरतमंदों को पानी का घड़ा (मटका), शर्बत या सत्तू का दान कर सकते हैं.  इससे पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है.

पीले रंग की वस्तुओं का दान
भगवान राम और माता सीता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है. आज चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र या पीले फलों (जैसे आम या केला) का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है .

भूमिपुत्री के निमित्त भूदान या श्रम दान
माता सीता भूमि से प्रकट हुई थीं, इसलिए आज के दिन गौशाला में हरा चारा खिलाना या मिट्टी के पात्रों का दान करना बहुत शुभ है. यदि संभव हो, तो किसी बगीचे या मंदिर में पौधा लगाना भी एक प्रकार का जीवित दान माना जाता है.

सामर्थ्य अनुसार स्वर्ण या चांदी
आर्थिक समृद्धि के लिए आज के दिन छोटी सी चांदी की बिछिया या कोई भी चांदी का सिक्का दान करना मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला माना गया है.

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