25 अप्रैल 1859 को मिस्र के पोर्ट सईद में स्वेज नहर के निर्माण की नींव रखी गई. स्वेज स्ट्रेट 101 मील तक फैला एक मानव निर्मित जलमार्ग है. यह भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है. इस विशाल प्रोजेक्ट को शुरू वाले फ्रांसीसी डिप्लोमेट फर्डिनेंड डी लेसेप्स ने कुल्हाड़ी मारकर निर्माण कार्य की शुरुआत की थी.
एशिया और अफ्रीका महाद्वीपों को जोड़ने वाले स्वेज क्षेत्र में प्राचीन काल से ही नहरें बनी हुई हैं. मिस्र के टॉलेमिक शासकों के शासनकाल में, एक नहर बिटर लेक्स को लाल सागर से जोड़ती थी और एक नहर तिमसाह झील से उत्तर की ओर नील नदी तक जाती थी. ये नहरें या तो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गई थीं या सैन्य कारणों से जानबूझकर नष्ट कर दी गईं.
15वीं शताब्दी की शुरुआत में ही यूरोपीय लोगों ने स्वेज के पार एक नहर बनाने की कल्पना की थी, जिससे व्यापारी भूमध्य सागर से हिंद महासागर तक लाल सागर के रास्ते जा सकें. बजाय इसके कि उन्हें अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के चारों ओर लंबी दूरी तय करनी पड़े.
स्वेज नहर का पहला सर्वेक्षण 18वीं शताब्दी के अंत में मिस्र पर फ्रांसीसी कब्जे के दौरान हुआ था और जनरल नेपोलियन बोनापार्ट ने स्वयं एक प्राचीन नहर के अवशेषों का निरीक्षण किया था. फ्रांस ने नहर के लिए आगे अध्ययन किया और 1854 में काहिरा में पूर्व फ्रांसीसी कौंसुल फर्डिनेंड डी लेसेप्स ने मिस्र के ओटोमन गवर्नर के साथ नहर निर्माण के लिए एक समझौता किया.
इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने निर्माण योजना तैयार की और 1856 में स्वेज नहर कंपनी का गठन किया गया और उसे काम पूरा होने के बाद 99 वर्षों तक नहर के संचालन का अधिकार दिया गया.
स्वेज नहर का निर्माण कार्य 25 अप्रैल 1859 में शुरू हुआ. शुरुआत में जबरन काम करने वाले मजदूरों द्वारा कुल्हाड़ी और फावड़े से खुदाई की गई. बाद में, ड्रेजर और स्टीम शॉवेल लेकर यूरोपीय मजदूर आए. श्रम विवादों और हैजा महामारी के कारण निर्माण कार्य धीमा हो गया और स्वेज नहर 1869 तक बनकर तैयार नहीं हो सकी.
निर्धारित समय से चार साल देरी से 17 नवंबर 1869 को, नेपोलियन तृतीय की पत्नी, फ्रांसीसी महारानी यूजेनी की मौजूदगी में एक भव्य समारोह में स्वेज नहर का आधिकारिक उद्घाटन किया गया.
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