उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने आज हाई स्कूल और इंटरमीडिएट का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल 10वीं में कुल प्रतिशत 92.10% और 12वीं में 85.11% छात्र पास हुए हैं. वहीं, 98 प्रतिशत नंबर लाकर गीतिका पंत और सुशीला मेहंदीरत्ता में टॉप किया है. वहीं, हरिद्वार की वशिंका ने 97 प्रतिशत नंबर लाकर तीसरा स्थान अपने नाम किया है. एक साधारण परिवार से आने वाली वंशिका की ये उपलब्धि कई मायनों में खास है.

टैक्सी ड्राइवर हैं वंशिका के पिता

उत्तराखंड 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरा स्थान हासिल करने वाली वंशिका सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज मायापुर स्कूल से पढ़ाई की है. उनके पिता टैक्सी ड्राइवर हैं. इससे ही उनके परिवार का गुजर बसर होता है. सिंपल परिवार से आने वाली वंशिका की इस उपलब्धि से शिक्षक, परिजन और साथ के छात्र बहुत खुश हैं. वंशिका से जब पूछा गया कि वह आगे क्या करना चाहती हैं, तो उन्होंने कहा कि वह आगे पढ़कर प्रोफेसर बनना चाहती हैं और टीचिंग लाइन में करियर सेट करना चाहती हैं. इस उपलब्धि के लिए बहुत मेहनत की है. जो क्वेश्चन आए थे उसके लिए कड़ी मेहनत की थी. शुरू से लास्ट तक कंसिस्टेंसी के लिए रोज पढ़ाई करती थी और किसी भी दिन ब्रेक नहीं लेती थी. इसका श्रेय मैं अपने पेरेंट्स को दूंगी, उन्होंने मुझे बहुत सर्पोट किया है. स्कूल भी बहुत ज्यादा सपोर्टिंग था. वंशिका ने बताया कि क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए, कहां टाइम वेस्ट होगा इस दिशा में स्कूल और टीचर्स बहुत ज्यादा सपोर्टिव हैं.

क्या बोले स्कूल के प्रधानाचार्य?

प्रधानाचार्य विजय पाल सिंह का कहना है कि आज खुशी का दिन है. पूरे साल बच्चे मेहनत करते हैं और उनका अच्छा परिणाम आया है सभी बच्चों को जिन्होंने अच्छे अंक प्राप्त किए हैं, मैं सबको खूब सारी शुभकामनाएं देता हूं. इस विद्यालय में प्रतिवर्ष उत्तराखंड की मेरिट में स्थान प्राप्त किए हैं और इस वर्ष भी टॉप 3 में इंटरमीडिएट में वंशिका ने स्थान प्राप्त किया है. मैं वंशिका को उनके माता-पिता को, उनके गुरुजनों को बधाइयां शुभकामनाएं देता हूं.

परिवार में खुशी का माहौल

वंशिका की मां निक्की का कहना है कि यह बहुत खुशी की बात है. इस उपलब्धि के लिए टीचर तो सबसे ज्यादा सपोर्टिंग रहे हैं और परिवार वालों का भी साथ है और इसी मेहनत का यह परिणाम है. वंशिका के भाई कुणाल का कहना है कि बहुत खुशी की बात है कि उसने बोर्ड में तीसरा स्थान हासिल किया है. जिस हिसाब से उसने मेहनत की है, मुझे पता था कि वह अचीव कर लेगी और वह रात में सोई भी नहीं थी. पूरे दिन पढ़ती रहती थी, देखते लगता था कि कुछ तो अचीव करेगी और कुछ ना पोजीशन आएगी.

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