40 लाख के पैकेज से लिया था बड़ा घर-गाड़ी, नौकरी गई तो रैपिडो चला रहा शख्स, लोग दे रहे ये करियर एडवाइस – home loan emi burden job loss financial advice middle class struggles edmm


कहते हैं कि अपना घर होना हर किसी का सपना होता है, लेकिन जब यह सपना 95 हजार रुपये की EMI और ‘जॉबलेस’ होने के डर के साथ आता है, तो यह किसी बुरे सपने से कम नहीं होता. सोशल मीडिया पर एक यूजर के दोस्त की आपबीती वायरल हो रही है, जिसने 40 LPA (लाख सालाना) की सैलरी के भरोसे नोएडा की एक सोसायटी में 1.4 करोड़ का 3BHK फ्लैट लिया. लेकिन आज वह शख्स 3 महीने से बेरोजगार है और घर चलाने के लिए ‘रैपिडो’ बाइक टैक्सी चलाने को मजबूर है.

यूजर ने पूछा कि अगर आप इसकी जगह होते तो क्या करते. इस सवाल के जवाब में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस कहानी ने नई बहस छेड़ दी है. लोग कह रहे हैं कि मिडिल क्लास अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बैंक की किस्तों में झोंक देता है.

वैसे तो 40 लाख का पैकेज सुनने में बड़ा लगता है, लेकिन टैक्स और हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी के बाद 95 हजार की EMI चुकाना जोखिम भरा फैसला था.

एक यूजर ने लिखा, ‘दिखावे की दुनिया ने मिडिल क्लास को कहीं का नहीं छोड़ा. हम अपनी मेंटल हेल्थ एक फ्लैट के लिए दांव पर लगा देते हैं.’

अगर आप भी ऐसी स्थिति में हैं, तो क्या करें?
इस पोस्ट पर आए कमेंट्स में कुछ बेहद काम की सलाह दी गई हैं, जो करियर की शुरुआत करने वाले छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए ‘फाइनेंशियल गाइड’ का काम कर सकती हैं.

एक यूजर ने ल‍िखा कि अगर नौकरी चली गई तो सबसे पहले बैंक से बात कर कुछ महीनों के लिए EMI रुकवाने का आग्रह करें. वहीं एक और यूजर ने ल‍िखा खुद उस महंगे फ्लैट में रहने के बजाय उसे किराए पर चढ़ा दें और खुद किसी सस्ते मकान में शिफ्ट हो जाएं. इससे EMI का एक हिस्सा रेंट से निकल जाएगा.

वहीं इस घटना ने ‘प्राइवेट बनाम सरकारी नौकरी’ की बहस को भी हवा दी है. एक यूजर का तर्क है कि प्राइवेट नौकरी वालों को लोन लेने के बजाय बचत पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मंदी (Recession) और छंटनी (Layoffs) का दौर कभी भी आ सकता है.

करियर बनाने वाले युवाओं के लिए 3 बड़े सबक
सैलरी का 30% नियम अपनाएं, यानी आपकी EMI कभी भी आपकी इन-हैंड सैलरी के 30-35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
डिग्री के साथ ‘स्किल’ भी बढ़ाते रहें, सिर्फ एक कंपनी के भरोसे न रहें, अपनी स्किल को अपडेट रखें ताकि नौकरी जाने पर तुरंत दूसरा विकल्प मिल सके.
अगर घर आपकी रातों की नींद छीन रहा है, तो वह ‘एसेट’ नहीं, ‘लायबिलिटी’ है. ऐसे में बिना हिचकिचाहट उसे बेच देना ही बुद्धिमानी है.

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