ईरान की न्यायपालिका बीता हेम्मती (Bita Hemmati) को फांसी देने की तैयारी कर रही है. इस साल जनवरी में देशभर में फैले सरकार विरोधी प्रदर्शनों में कथित भूमिका के लिए हेम्मती मौत की सजा पाने वाली पहली महिला प्रदर्शनकारी बन सकती हैं. इस मामले में उनके पति मोहम्मदरेजा मजीद अस्ल (34) और दो अन्य लोगों- बेहरोज और कुरोश जमानिनेजाद को भी मौत की सजा सुनाई गई है.
नेशनल काउंसिल आफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) के बयान के मुताबिक, न्यायपालिका ने इन चारों पर विस्फोटक और हथियारों के इस्तेमाल, सुरक्षाबलों पर हमला करने और छतों से बोतल, पत्थर व ज्वलनशील पदार्थ फेंकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके अलावा, उन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और नारेबाजी करने के भी आरोप हैं.
अधिकारियों ने इन घटनाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. इन प्रदर्शनकारियों पर दुश्मन देशों के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया है. बीता हेम्मती के एक अन्य रिश्तेदार अमीर हेम्मती को भी राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ साजिश और सरकार विरोधी प्रोपेगेंडा के आरोप में करीब छह साल की जेल की सजा सुनाई गई है. इन सभी को राजधानी तेहरान से गिरफ्तार किया गया था, जो उस समय प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ था.
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ईरान में सरकारी विरोधी प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान में दुकानदारों और व्यापारियों की हड़ताल से शुरू हुए थे, जो जल्द ही पूरे देश में फैल गए. कुछ ही दिनों में छात्रों समेत समाज के कई वर्ग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर गए. ईरान की इस्लामिक सरकार ने इन प्रदर्शनों के खिलाफ सख्ती दिखाई. सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए या घायल हुए, जबकि 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया. तबसे कई प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जा चुकी है.
ईरान में 2025 में 1,639 लोगों को फांसी
ईरान में हाल के समय में फांसी के मामलों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है. नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स और पेरिस स्थित टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी के मुताबिक, साल 2025 में ईरान में कम से कम 1,639 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें 48 महिलाएं शामिल थीं. यह आंकड़ा 2024 के 975 मामलों की तुलना में 68% अधिक है. इन आंकड़ों के मुताबिक ईरान में औसतन हर दिन 4 से अधिक लोगों को फांसी दी गई. हाल ही में ईरान ने गेजेल हेसार जेल में एक युवा संगीतकार को भी फांसी दी थी.
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