मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने राज्यसभा में महाभियोग चलाने के लिए एक नया नोटिस जमा किया है. मार्च में मात खाने के बाद, अप्रैल के इस नई कोशिश में अब तक राज्यसभा के 73 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं. विपक्ष इस बार पहले से ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है और उसका टारगेट 200 से ज्यादा सांसदों का समर्थन हासिल करना है. इससे पहले, 12 मार्च को भी 193 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में लाया गया था, जिसमें ज्ञानेश कुमार पर पद की मर्यादा के प्रतिकूल आचरण और पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए गए थे.
हालांकि, उस वक्त लोकसभा अध्यक्ष ने तकनीकी आधार पर प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इस बार, महिला आरक्षण संशोधन बिल के लोकसभा में गिरने से उत्साहित विपक्ष को उम्मीद है कि वह इस संवैधानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रहेगा.
विपक्ष द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव पत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इसमें मुख्य रूप से बिहार और अन्य राज्यों में चलाए गए वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पक्षपातपूर्ण व्यवहार का मुद्दा उठाया गया है. विपक्ष का दावा है कि ज्ञानेश कुमार ने चुनावों के दौरान भेदभावपूर्ण आचरण किया है, जो एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए घातक है.
क्या दावे किए गए हैं?
विपक्ष का तर्क है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का आचरण उनकी पद की गरिमा के मुताबिक नहीं है. यही वजह है कि वे उन्हें हटाने के लिए महाभियोग जैसा कड़ा संवैधानिक कदम उठा रहे हैं. हालांकि, महाभियोग की प्रक्रिया काफी जटिल है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में भारी बहुमत की जरूरत होती है. राज्यसभा में 73 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ शुरू हुआ यह कैंपेन अब 200 सांसदों के जादुई आंकड़े की तलाश में है.
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