देशभर में फैले एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जिसे गोवा से संचालित किया जा रहा था. गांधीनगर स्थित सीआईडी क्राइम के साइबर एक्सलेंस सेंटर की कार्रवाई में इस अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ. पुलिस ने एक साथ तीन जगहों पर छापेमारी कर 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 375 साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शामिल था और करीब 77 करोड़ रुपये की ठगी कर चुका था. इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है.
गांधीनगर के सीआईडी क्राइम के साइबर एक्सलेंस सेंटर ने देशव्यापी साइबर धोखाधड़ी गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. इस ऑपरेशन के तहत पुलिस ने गोवा, वडोदरा और पालनपुर में एक साथ छापेमारी की. तीन अलग-अलग टीमों का गठन कर यह अभियान चलाया गया, जिससे गिरोह को चारों तरफ से घेर लिया गया. इस समन्वित कार्रवाई के चलते पुलिस को बड़ी सफलता मिली और कुल 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. इस गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था.
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह लंबे समय से देशभर में साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था. अब तक 375 मामलों में इनकी संलिप्तता सामने आई है. इन धोखाधड़ी के मामलों में कुल 77 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी. यह रकम अलग-अलग राज्यों के लोगों से ठगी गई थी, जिससे इस गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा और संगठित माना जा रहा है. पुलिस अब इन मामलों से जुड़े अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटा रही है.
गिरफ्तार आरोपियों में से 9 लोगों को गोवा से पकड़ा गया है, जिनमें इस गिरोह का मुख्य सरगना जीतूभाई ठक्कर भी शामिल है. वह पाटन का रहने वाला है और गोवा से ही पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था. इसके अलावा वडोदरा से 5 आरोपी गिरफ्तार किए गए, जिनमें किरण जोशी और सिद्धराज शिरवाडिया जैसे मुख्य ऑपरेटर शामिल हैं. पालनपुर से मीत श्रीमाली और मेहुल सोलंकी को गिरफ्तार किया गया है. सभी आरोपियों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं.
इस बड़े ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं. आरोपियों के पास से 15 लैपटॉप, 87 मोबाइल फोन, 126 सिम कार्ड, 2 राउटर, 15 डेबिट कार्ड और 4 खाली चेक जब्त किए गए. इन उपकरणों का इस्तेमाल पूरे देश में साइबर अपराध को अंजाम देने के लिए किया जाता था. पुलिस अब इन डिवाइसों की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि और भी सबूत जुटाए जा सकें.
एसपी विवेक भेड़ा के मुताबिक, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था. ये लोग पहले फर्जी कंपनियां बनाते थे या फिर भोले-भाले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे, जिन्हें ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है. इसके बाद साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग से प्राप्त रकम को इन खातों में ट्रांसफर किया जाता था. यह पूरा नेटवर्क तकनीकी रूप से काफी मजबूत था और कई स्तरों पर काम करता था.
जांच में यह भी सामने आया कि इन खातों में जमा पैसे को बाद में डॉलर या क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था. इसके बाद इस रकम को अवैध तरीके से विदेश भेज दिया जाता था, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था. यह तरीका साइबर अपराधियों के बीच काफी आम हो चुका है. पुलिस अब इस पूरे फाइनेंशियल ट्रेल को खंगाल रही है ताकि पैसे के अंतिम ठिकाने तक पहुंचा जा सके.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे अन्य राज्यों से जानकारी मिलती जाएगी, इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है. यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे देशभर में ऐसे गिरोहों पर नकेल कसने में मदद मिलेगी.
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